संदेश

अगस्त, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

(जनशक्ति खबर) नीतीश कैबिनेट की अहम बैठक में 31 एजेंडों पर लगी सरकार की मुहर,पूर्व पीएम भारत रत्न स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्यतिथि हर साल 16 अगस्त को पटना में राजकीय समारोह के रूप में मनाया जाएगा।

चित्र
  उपेन्द्र सिंह_ नीतीश कैबिनेट की अहम बैठक में 31 एजेंडों पर लगी सरकार की मुहर,पूर्व पीएम भारत रत्न स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्यतिथि हर साल 16 अगस्त को पटना में राजकीय समारोह के रूप में मनाया जाएगा।मुख्यमंत्री सचिवालय के कैबिनेट हॉल में चल रही नीतीश कैबिनेट की बैठक खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 31 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगी है।नीतीश कैबिनेट ने कृषि विभाग, खेल विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, श्रम संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, पथ निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, मद्य निषेद उत्पाद एवं निबंधन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, विधि विभाग, सूचना प्रावैधिकी विभाग, वित्त विभाग, गृह विभाग, श्रम संसाधन विभाग और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग से जुड़े कुल 31 प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्यतिथि हर साल 16 अगस्त को पटना में राजकीय समारोह क...

(जनशक्ति खबर) बांग्लादेश में इन तीन छात्रों ने दस दिनों के अंदर कर दिया तख्ता पलट,,जानिए कैसा भड़का अनोदलन।

चित्र
  उपेन्द्र सिंह का रिपोर्ट__ बांग्लादेश में बीते करीब एक महीने से आरक्षण के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। इस मूवमेंट के खिलाफ शेख हसीना सरकार ने सख्ती की तो यह उन्हें ही सत्ता से बटाने के आंदोलन में तब्दील हो गया।अंत में हालात इतने बिगड़ गए कि 4 अगस्त को शेख हसीना ने पीएम पद से इस्तीफा दिया और देश छोड़कर ही भाग निकलीं। फिलहाल वह भारत में हैं और यहां से ब्रिटेन, फिनलैंड जैसे किसी देश में जाने की जुगत में हैं। इस बीच हर कोई यह भी जानना चाहता है कि आखिर इतना बड़ा आंदोलन अचानक कैसे खड़ा हो गया और इसके पीछे कौन था। इसका जवाब तीन छात्र हैं- नाहिद इस्लाम, आसिफ महमूद और अबू बकर मजूमदार। तीनों ही छात्र ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं और आरक्षण के खिलाफ चलने वाले आंदोलन के अगुवा थे। एक खबर के अनुसार तीनों को ही 19 जुलाई को अगवा कर लिया गया था। इसके बाद उनसे कड़ी पूछताछ की गई और उत्पीड़न भी हुआ। फिर 26 जुलाई को छोड़ दिए गए। इसके बाद आंदोलन को इन लोगों ने फिर से आगे बढ़ाया और करीब 10 दिन के अंदर ही तख्तापलट हो गया। अब कमान सेना के हाथों में हैं। अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज है, जिसमें इन तीन...